टीकमगढ़।राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन अंतर्गत रबी 2050-26 में समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन तिलहन फसल सरसों की प्रजाति पूसा मस्टर्ड-32 (पी.एम.-32), क्षेत्रफल 40 हेक्टेयर में लगायी गयी थी, विगत दिवस कृषि विज्ञान केंद्र टीकमगढ़ के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.एस. किरार के मार्गदर्शन में वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह प्रभारी समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन तिलहन के द्वारा ग्राम पाण्ड़ेर में प्रशिक्षण व प्रक्षेत्र दिवस मनाया गया।वर्तमान में हितग्राही कृषकों की सरसों फसल में माहू का प्रकोप अत्यधिक रूप से देखा गया। माहू तना एवं पत्तियों का रस चूसक कीट है, जिसके कारण सरसों फसल का उत्पादन प्रभावित होता है। माहू कीट के नियंत्रण हेतु एसिटामिप्रिड 20 प्रतिशत एस.पी. दवा का 0.5 ग्रा./ली. पानी की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गयी। साथ ही कृषकों को दवा का वितरण भी किया गया।चूँकि पूसा मस्टर्ड-32 5 वर्ष के अंदर की प्रजाति है इसलिए वैज्ञानिकों द्वारा कृषकों को समझाया गया कि उपरोक्त फसल से प्राप्त बीज को अपने स्वयं के ग्राम व आसपास के गांवों में इस बीज को अन्य किसानों को विक्रय कर इसका फैलाव करें, जिससे जिले के अधिक से अधिक किसान इस प्रजाति का लाभ ले सकें।कार्यक्रम के दौरान पाया गया कि कुछ किसान भाई सब्जियों की खेती भी कर रहे हैं जिसमें मिर्च, टमाटर, फूलगोभी, पत्ता गोभी, आदि में सफेद मक्खी एवं माहू का प्रकोप दिख रहा है, इनके नियंत्रण हेतु इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. दवा का 0.5 ग्रा./ली. पानी की दर से छिड़काव करें। प्याज एवं लहसुन के पौधे फफूंद जनित रोग से पीले पड़ रहे हैं, इसके नियंत्रण हेतु मेटलैक्सिल 8 प्रतिशत + मैनकोजेब 64 प्रतिशत डब्लू.पी. दवा का 2 ग्रा./ली. पानी की दर से छिड़काव किया जाता है। प्रशिक्षण एवं प्रक्षेत्र दिवस में ग्राम पाण्ड़ेर, तिंदारी, हरपुरा, सूरजपुर, करमारई एवं बम्होरी के लगभग 70 किसान उपस्थित रहे।
कृषि विज्ञान केंद्र टीकमगढ़ के द्वारा समूह अग्रिम प्रदर्शन तिलहन अंतर्गत प्रशिक्षण व प्रक्षेत्र दिवस संपन्न।

