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उज्जैन में लैंड पूलिंग पर सियासी घमासान, अपनी ही सरकार के खिलाफ उतरे भाजपा विधायक

उज्जैन सिंहस्थ के लिए लाई गई लैंड पूलिंग योजना के खिलाफ किसान बड़े आंदोलन की तैयारी में हैं। इस बीच भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। जैन ने पत्र में कहा है कि किसान हित में लैंड पूलिंग योजना निरस्त होनी चाहिए। अगर किसान 26 दिसंबर से आंदोलन शुरू करते हैं, तो मैं भी इसमें सम्मिलित होने के लिए विवश रहूंगा। इससे यह बात स्पष्ट हो गई है कि लैंड पूलिंग योजना को लेकर पार्टी में आपसी मतभेद हैं।
सीएम को लिखे पत्र में विधायक जैन ने कहा कि 17 नवंबर 2025 को भोपाल में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और किसान संघ के प्रतिनिधियों के साथ आपकी (सीएम) उपस्थिति में बैठक संपन्न हुई थी। तब योजना वापस लेने का निर्णय हुआ था। इसके बाद किसान संघ ने उत्सव रैली निकाली थी, जिसमें मैं भी शामिल हुआ था। इस बीच प्रशासन, किसान संघ और प्रेस के माध्यम से यह ध्यान में आया है कि लैंड पूलिंग योजना यथावत है और किसान एक बार फिर 26 दिसंबर से आंदोलन करने जा रहे हैं। इस आंदोलन में मैं भी शामिल होने के लिए विवश रहूंगा। अत: आपसे आग्रह है कि किसानों के हित में यथा उचित निर्णय करें।                                            18 जिलों की 115 तहसीलों से किसान उज्जैन पहुंचेंगे
उज्जैन में 26 दिसंबर से ‘डेरा डालो-घेरा डालो आंदोलन’ शुरू करने का एलान किसान संघ ने किया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने कहा कि आंदोलन में 18 जिलों की 115 तहसीलों के किसान शामिल होंगे। किसान अपने साथ आवश्यक सामग्री लेकर प्रशासनिक कार्यालयों का घेराव करेंगे और चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा।

हमारा सिर्फ इतना कहना है कि सिंहस्थ मेला क्षेत्र में किसानों की जमीन हथियाने का षड्यंत्र रुके। सिंहस्थ सदियों से अस्थायी स्वरूप में आयोजित होता रहा है, जहां स्थायी कंक्रीट निर्माण न तो परंपरा के अनुरूप है और न ही आवश्यक। किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण से आजीविका, कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा।

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