आगर-मालवा जिले की मिट्टी में आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी जा रही है। यह कहानी है बड़ौद विकासखंड के ग्राम सारसी स्थित रामदेव समूह की श्रीमती पार्वती बाई की, जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से खुद की नई पहचान बनाई है “बीमा सखी” के रूप में।कभी सीमित आय तक सिमटी ज़िंदगी आज आत्मविश्वास और सम्मान से भर गई है। आज पार्वती बाई प्रतिमाह 7000 रुपए से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं। यह बदलाव संभव हुआ भारतीय जीवन बीमा निगम और आजीविका मिशन की पहल से, जिसके तहत समूह से जुड़ी महिलाओं को अभिकर्ता के रूप में चयनित कर प्रशिक्षित किया जा रहा है।पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद जिले की पाँच महिलाओं को अभिकर्ता नियुक्त किया गया। योजना के अंतर्गत प्रारंभिक एक वर्ष तक प्रत्येक बीमा सखी को 7000 रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है, साथ ही पॉलिसियों पर 28 प्रतिशत तक कमीशन भी प्राप्त हो रहा है। हर माह न्यूनतम दो पॉलिसी करना अनिवार्य है, और पार्वती बाई ने तो लक्ष्य से अधिक कार्य कर अपनी प्रतिभा साबित की है। उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन पर एलआईसी द्वारा उन्हें पुरस्कार स्वरूप ट्रॉली बैग प्रदान कर सम्मानित भी किया गया। यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उनकी मेहनत और आत्मविश्वास की पहचान है।
इस सफलता की कहानी में अन्य महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। ग्राम सुठेली की अनीता नागदिया ने मात्र चार माह में 62,412 का मानदेय एवं कमीशन अर्जित किया। इसी तरह आरती परमार (जगतपुरा), चेतना गंगवाल (जस्साखेड़ी) और ममता विश्वकर्मा (खजूरी कानड़) भी अपने कार्य से नई मिसाल कायम कर रही हैं। चार महीनों में इन महिलाओं ने अपनी व्यावसायिक दक्षता, प्रभावी संवाद कौशल और समर्पण से यह सिद्ध कर दिया कि अवसर मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं।बीमा सखी योजना, भारतीय जीवन बीमा निगम और आजीविका मिशन के मध्य हुए अनुबंध के तहत संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य महिलाओं को आजीविका के नए अवसर प्रदान कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। आज पार्वती बाई और उनकी साथी महिलाएं सिर्फ बीमा पॉलिसी नहीं बेच रहीं वे अपने सपनों को साकार कर रही हैं, परिवार की खुशियों को संवार रही हैं और समाज में आत्मनिर्भरता की नई रोशनी फैला रही हैं।
खुशियों की दास्तां पार्वतीबाई की नई पहचान है, बीमा सखी ।

