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एआई से तैयार फोटो अपलोड करने का राष्ट्रीय जल पुरस्कार से कोई संबंध नहीं है

खंडवा। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा ने जिला पंचायत के सभाकक्ष में सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया प्रतिनिधियों को बताया कि “जल संचय जन भागीदारी” केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा चलाया गया एक अभियान है। यह अभियान देश में जनभागीदारी से जल सरचनाओ के निर्माण को प्रोत्साहन देने के उददेश्य से विगत वर्ष प्रारंभ हुआ था, जो कि 31 मई 2025 को समाप्त हो चुका है। इस अभियान अंतर्गत जिला खंडवा द्वारा 31 मई 2025 तक कुल 129046 कार्यों की फोटो पोर्टल पर अपलोड की गई। इस अभियान अंतर्गत समुदाय, संस्था, पंचायत, नगर परिषद, नगर निगम आदि द्वारा कराये गये ऐसे जल संरक्षण के कार्य जैसे रूफटाप रेनवाटर हार्वेस्टिंग, सोख्ता गडडा, रिचार्ज पीट, बोर वेल रिचार्ज, बंद बोर रिचार्ज, डगवेल रिचार्ज, ओपन वेल रिचार्ज, गली प्लग, नाला बंड, बोल्डर वाल, गेबियन, रिचार्ज साफट, कंटूर ट्रेंच, परकोलेशन पौंड, चेकडेम मरम्मत, स्टापडेम मरम्मत जैसी जल संरचनाओ का निर्माण कर उनके फोटो अपलोड किए गए हैं।   जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा इन  सभी फोटो का डेस्क सत्यापन किया गया, इसके अतिरिक्त रेण्डम जांच पर कुल कार्यों के 1 प्रतिशत का फील्ड चेक भी किया गया।
   सीईओ जिला पंचायत डॉक्टर गौड़ा ने बताया कि ग्राम पंचायत शाहपुरा माल, पलानीमाल, डोटखेडा एवं हरवंशपुरा अंतर्गत की गई शिकायत पूर्व में जनसुनवाई में प्राप्त आवेदन के आधार पर प्रकाशित की गई है। इन कार्यो का जल संचय जन भागीदारी अभियान_ 1.0 से कोई संबंध नही है। उन्होंने बताया कि जनसुनवाई में दिनांक 28 नवंबर एवं 23 दिसंबर को प्राप्त शिकायतों के आधार पर जांच कराई गई और जांच उपरांत ग्राम रोजगार सहायक को पद से हटा दिया गया है।
कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा खंडवा जिले में किए जा रहे जल संचयन कार्यों संबंधी कार्यों के संबंध में प्रथमदृष्टया फेक न्यूज प्रसारित की जा रही है। इस संबंध में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉक्टर नागार्जुन गौड़ा ने स्पष्ट किया है कि जल संचय जन भागीदारी कार्यक्रम के अंतर्गत पूरे देश में सर्वाधिक 1.25 लाख से अधिक जल संरक्षण कार्यों के निर्माण हेतु खंडवा ज़िले को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। जल संचय जन भागीदारी कार्यक्रम के लिए एक अलग “JSJB पोर्टल” उपलब्ध था। जिला प्रशासन द्वारा ब्लॉक स्तर एवं जिला स्तर पर सावधानीपूर्वक और गहन जांच के पश्चात सत्यापित फ़ोटो ही JSJB पोर्टल पर अपलोड की गई थीं।
इसके अतिरिक्त, कैच द रेन (CTR) नामक एक अन्य पोर्टल है, जिस पर सामान्यतः जल संरक्षण से संबंधित आईईसी फ़ोटो केवल शैक्षणिक एवं प्रेरणात्मक उद्देश्य से अपलोड की जाती हैं। जिला प्रशासन के संज्ञान में यह बात आई है कि “कैच द रेन” पोर्टल पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से तैयार कर 21 फ़ोटो अपलोड की गई थीं, संभवतः दुर्भावनापूर्ण इरादों से। इन लगभग ए आई जनित फ़ोटो को अपलोड करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध जिला प्रशासन द्वारा कार्रवाई की जा रही है। परंतु यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया जाता है कि कैच द रेन पोर्टल,  “जल संचय जन भागीदारी”  पोर्टल से पूर्णतः भिन्न है, और कैच द रेन पोर्टल पर अपलोड की गई शैक्षणिक फ़ोटो को चल संचय जन भागीदारी पुरस्कार के लिए विचार में नहीं लिया जाता है।

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