विदिशा। श्रीमद् भगवत गीता का ज्ञान मनुष्य के अंतरण को विकारों से मुक्त कर निर्मल बना देता है और उसके जीवन को पवित्रता से भर देता है। गीता का ज्ञान हमें शिक्षण देता है कि हमारा ज्ञानी होना ही पर्याप्त नहीं है चरित्रवान होना भी आवश्यक है । ज्ञान प्राप्ती का लक्ष्य चरित्रवान व्यक्तित्व का सृजन करना ही है। अतः वर्तमान समय में समाज के नैतिक पतन को रोकने के लिए गीता के ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाना परम आवश्यक है। उक्त उदगार गायत्री प्रज्ञा पीठ विदिशा में मुख्य वक्ता के रूप में गीता पर व्याख्यान देते हुए पंडित केशव प्रसाद शास्त्री जी ने व्यक्त किए। इसके पूर्व विश्व गीता प्रतिष्ठानम के प्रांत गीता शिक्षण प्रमुख सुरेन्द्र कुशवाह जी , एस ए टी आई कॉलेज के प्रोफेसर श्री के . के पंजाबी जी ,एस ए टी आई कॉलेज के विभाग अध्यक्ष जे एस चौहान जी , ब्रह्माकुमारी सपना दीदी , इतिहासविद गोविंद देवलिया जी , राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अखिल भारतीय स्वर्णकार महासभा लायन अरुण कुमार सोनी जी ने भी गीता पर व्याख्यान दिए।
अरुण कुमार सोनी ने गीता के श्लोक ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मां फलेषु कदाचन’बहुत प्यारी व्याख्या की । इस आधे श्लोक को बहुत गहराई के साथ स्पष्ट किया। आपने कहा कि इसका शाब्दिक अर्थ तो सभी जानते हैं। परंतु हमारे जीवन में इसका उतरना हो तभी यथार्थ में जानना कहलाएगा। आपने कहा कि इसका चिंतन मनन बहुत जरूरी है, तभी यह हमारे जीवन में उतरता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता एस ए टी आई कॉलेज के डायरेक्टर श्री वाय .के जैन जी ने की एवं कार्यक्रम का संचालन डॉ मनोज शास्त्री जी ने किया। विशेष अतिथि के रूप मे श्री मनोज कटारे जी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। इस आयोजन के संबंध में जानकारी देते हुए कार्यक्रम के संयोजक मुकेश श्रीवास्तव ने बताया कि गायत्री प्रज्ञा पीठ स्वर्णकार कॉलोनी विदिशा में श्री राम व्याख्यान माला के अंतर्गत विभिन्न धार्मिक आध्यात्मिक विषयों पर व्याख्यान का आयोजन निरंतर किया जा रहा है। इसी क्रम मे गीता जयंती महोत्सव सप्ताहके अंतर्गत इस बार “गीता के ज्ञान का व्यावहारिक जीवन में महत्व” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया था । अपने उद्बोधन में उन्होंने बताया कि धर्म आध्यात्म और समाज सेवा के क्षेत्र में गायत्री परिवार आज विश्व की सबसे बड़ी संस्था है और विश्व के 80 देश में इसकी शाखाओ का विस्तार हो चुका है। देश भर में फैले 5000 से अधिक शक्तिपीठ , प्रज्ञा पीठ ,एवं गायत्री चेतना केंद्रों के माध्यम से जन जागृति का कार्य निरंतर किया जा रहा है ।


