देशभर में पत्रकारों पर हो रहे हमले अब तक देशभर में लगभग 45- 50पत्रकारों ने कवरेज दौरान अपनी जान गवायाl
इंदौर में न्यूज 24 की रिपोर्टिंग टीम पर हुए हमले ने पूरे पत्रकारिता जगत को झकझोर दिया है। घटना शुक्रवार को RTO कार्यालय परिसर के बाहर हुई, जहाँ वरिष्ठ रिपोर्टर हेमंत शर्मा और कैमरामैन राजा खान पर अचानक हमला कर दिया गया। दोनों पत्रकार घायल हुए हैं। इस घटना के बाद प्रदेशभर के पत्रकारों में आक्रोश है और एक बार फिर मध्यप्रदेश सरकार से पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग जोर पकड़ रही है।
अचानक हुआ हमला — कैमरा तोड़ा, कैमरामैन को बंधक बनाने की कोशिश सूत्रों के अनुसार, न्यूज 24 की टीम पिछले तीन दिनों से इंदौर RTO में अनियमितताओं, दलाली और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच कर रही थी। शुक्रवार को जब वे अंतिम रिपोर्ट को फाइनल कर रहे थे, तभी कुछ लोगों ने उन्हें घेरकर अचानक हमला कर दिया।
हमलावरों ने:
दोनों पत्रकारों के साथ मारपीट की कैमरा तोड़ दिया और कैमरामैन को कुछ समय के लिए बंधक बनाने की कोशिश की हमले के बाद दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका उपचार जारी है।
FIR दर्ज, लेकिन कार्रवाई को लेकर उठे सवाल
पुलिस ने सात नामजद और कई अज्ञात आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है,लेकिन गिरफ्तारी में देरी को लेकर पत्रकार संगठनों ने नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि यह गंभीर हमला है और इसमें तत्काल, कठोर तथा पारदर्शी कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रदेशभर में बढ़ते हमले — पत्रकार समुदाय नाराज़
इंदौर उज्जैन भोपाल सहित पूरे प्रदेश के पत्रकार संगठनों ने इस घटना की तीखी निंदा की है। उनका कहना है कि फील्ड में काम करने वाले पत्रकार हमेशा जोखिम में रहते हैं खासकर भ्रष्टाचार, अवैध कारोबार या अनियमितताओं की रिपोर्टिंग के दौरान खतरा कई गुना बढ़ जाता है यदि पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो निर्भीक और स्वतंत्र पत्रकारिता खतरे में पड़ जाएगी
इसी के साथ पत्रकार संगठनों ने एक बार फिर सरकार से “पत्रकार सुरक्षा कानून” लागू करने की मांग की है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया सभी दलों ने जताई चिंता
घटना के बाद प्रदेश के कई राजनेताओं ने इस हमले को गंभीर बताया है।विपक्ष ने इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला कहा है उन्होंने प्रशासन से तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की वहीं सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने भी माना कि पत्रकारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए नेताओं ने कहा कि पत्रकार सुरक्षा कानून पर विचार जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके
क्यों जरूरी है पत्रकार सुरक्षा कानून?
भारत के कई राज्यों में पत्रकारों पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं। संवेदनशील रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकार सीधे खतरे का सामना करते हैं।
एक सशक्त सुरक्षा कानून—पत्रकारों को सुरक्षा देगा
हमले की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेगा और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूती प्रदान करेगा
घटना क्या संदेश देती है?
इंदौर में हुआ यह हमला केवल दो पत्रकारों पर हमला नहीं है। यह पत्रकारीय स्वतंत्रता, पारदर्शिता और जनता के जानने के अधिकार पर सीधा प्रहार है। जब तक पत्रकार सुरक्षित नहीं होंगे, तब तक समाज में सत्य सूचना का प्रवाह बाधित रहेगा।यह घटना लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है।
अखंड सत्ता का संपादकीय दृष्टिकोण
अखंड सत्ता का मानना है कि—पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर जनता के मुद्दे सामने लाते हैं इसलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य और समाज—दोनों की जिम्मेदारी है अखंड सत्ता सरकार से मांग करता है कि—
1. घटना के दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी की जाए
2. पत्रकार सुरक्षा से जुड़ी स्पष्ट और प्रभावी नीति बनाई जाए
3. मध्यप्रदेश में शीघ्र पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाए
4. प्रदेशभर में पत्रकारों पर होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए कड़े प्रावधान किए जाएँ
प्रदेशभर में पत्रकारों पर हो रहे हमले व इंदौर में न्यूज 24 की टीम पर हुआ हमला अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण,चिंताजनक और लोकतांत्रिक मूल्य व्यवस्था पर सीधा प्रहार है। यह केवल एक चैनल का मामला नहीं—बल्कि पूरे पत्रकार समुदाय और जनता के अधिकार से जुड़ा प्रश्न है अब समय आ गया है कि मध्यप्रदेश सरकार ठोस कदम उठाए और ऐसा वातावरण बनाए,जहाँ पत्रकार बिना भय, बिना दबाव और बिना जोखिम के अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर सकें।

