उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर की पावन धरा से प्रारंभ हुआ “जल गंगा संवर्धन अभियान” आज जल एवं पर्यावरण संरक्षण का एक व्यापक जनआंदोलन बन चुका है। लगभग 22 वर्ष पूर्व शिप्रा नदी के तट से शुरू हुआ यह अभियान अब पूरे मध्यप्रदेश में विस्तार पा रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विशेष प्रयासों से यह पहल जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की दिशा में नई ऊंचाइयों तक पहुंच रही है।प्रदेश की प्रमुख नदियों नर्मदा नदी, ताप्ती नदी, केन नदी एवं बेतवा नदी सहित अन्य जल स्रोतों के संरक्षण एवं उनके आसपास पर्यावरण संवर्धन हेतु मध्यप्रदेश शासन विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं सेवा संस्थाओं के सहयोग से योजनाबद्ध अभियान संचालित कर रहा है। उज्जैन से बोया गया यह बीज अब पूरे प्रदेश में हरित चेतना और जल संरक्षण के रूप में फलित हो रहा है।इसी क्रम में उज्जैन में “जल गंगा संवर्धन अभियान” अंतर्गत “शिप्रा तीर्थ परिक्रमा एवं गंगा दशमी महोत्सव” का आयोजन 25 एवं 26 मई 2026 को किया जा रहा है। यह आयोजन शिप्रा लोक संस्कृति समिति, महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ, उज्जैन विकास प्राधिकरण, रामघाट तीर्थ पुरोहित सभा अवंतिकापुरी एवं जिला प्रशासन उज्जैन के संयुक्त सहयोग से आयोजित होगा।
द्विदिवसीय शिप्रा तीर्थ परिक्रमा
आयोजन अंतर्गत दो दिवसीय शिप्रा तीर्थ परिक्रमा यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें हजारों श्रद्धालु सहभागिता करेंगे। परिक्रमा में शामिल श्रद्धालु शिप्रा तट स्थित पौराणिक तीर्थों के दर्शन-पूजन करेंगे।25 मई को प्रातः रामघाट से यात्रा का शुभारंभ अनिल फिरोजिया, बालयोगी संत उमेश नाथ जी महाराज, अनिल जैन कालूखेड़ा, मुकेश टटवाल, कलावती यादव, डॉ. रवि सोलंकी एवं ओम जैन सहित अन्य गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में होगा।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
26 मई को सायं 5 बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा माँ शिप्रा को 351 फीट लंबी चुनरी अर्पित की जाएगी। इस अवसर पर भक्ति संगीत एवं विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
कार्यक्रम के विशेष आकर्षण
– भारतीय नौसेना बैंड की भव्य प्रस्तुति
– प्रसिद्ध गायिका मैथिली ठाकुर एवं उनकी टीम द्वारा भक्ति संगीत प्रस्तुति
– 17 से 26 मई तक प्रतिदिन सायं 7:30 बजे हरिकथा — पं. ढोली बुवा, उज्जैन
– 25 मई को दत्त अखाड़ा में सायं 6 बजे श्रेयश शुक्ला (इंदौर) एवं संजो बघेल (जबलपुर) की विशेष प्रस्तुति
प्रदेश में पहली बार नौसेना बैंड की प्रस्तुति
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से प्रदेश में पहली बार भारतीय नौसेना बैंड की प्रस्तुति आयोजित की जा रही है। यह कार्यक्रम न केवल देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करेगा, बल्कि जल संरक्षण एवं पर्यावरण जागरूकता का संदेश भी जन-जन तक पहुंचाएगा। उल्लेखनीय है कि इसी क्रम में 27 मई को भोपाल में भी नौसेना बैंड की प्रस्तुति प्रस्तावित है।
परिक्रमा में पुरातत्व एवं पर्यावरण दल
शिप्रा नदी अपने गर्भ में अनेक पुरातात्विक रहस्य समेटे हुए है। समय-समय पर नदी से प्राचीन सिक्के, मूर्तियां एवं ऐतिहासिक अवशेष प्राप्त हुए हैं। परिक्रमा के दौरान डॉ. रमन सोलंकी के नेतृत्व में एक विशेष पुरातत्व दल इन ऐतिहासिक पहलुओं का अध्ययन करेगा।
इसके साथ ही एक पर्यावरण दल भी यात्रा में शामिल रहेगा, जो मार्ग में बीजारोपण कर हरियाली एवं पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा देगा।
शिप्रा तीर्थ का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव द्वारा ब्रह्मा की अंगुली पर प्रहार से निकली रक्तधारा पृथ्वी पर आकर शिप्रा नदी के रूप में प्रवाहित हुई। इसी कारण शिप्रा का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है।
जनभागीदारी और तैयारियां
पिछले एक पखवाड़े से विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं प्रशासनिक स्तर पर लगातार बैठकों और जागरूकता अभियानों के माध्यम से आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं। सोशल मीडिया एवं जनसंपर्क माध्यमों से लोगों को जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा एवं वाटर हार्वेस्टिंग के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
परिक्रमा की उपलब्धियां
– विगत 22 वर्षों से निरंतर द्विदिवसीय परिक्रमा का आयोजन
– प्रतिवर्ष लगभग 10 हजार श्रद्धालुओं की सहभागिता
– गांव-गांव चौपाल एवं नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से जनजागरण
– वैज्ञानिकों द्वारा शिप्रा संरक्षण हेतु परीक्षण रिपोर्ट शासन को प्रेषित
शासन की महत्वपूर्ण पहलें
परिक्रमा के मंच से पूर्व में की गई अनेक घोषणाएं अब साकार रूप ले चुकी हैं, जिनमें सेवरखेड़ी डैम निर्माण, नर्मदा-शिप्रा लिंक योजना, शिप्रा में मिलने वाले गंदे पानी के स्रोतों पर नियंत्रण, खान डायवर्जन एवं पर्यावरण सुधार कार्य प्रमुख हैं।
महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी, शिप्रा लोक संस्कृति समिति के सचिव नरेश शर्मा एवं आयोजन समिति ने समस्त श्रद्धालुओं, नागरिकों एवं पर्यावरण प्रेमियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में सहभागी बनकर जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के इस महाअभियान का हिस्सा बनें।
जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत शिप्रा तीर्थ परिक्रमा एवं गंगा दशमी महोत्सव 25-26 मई 2026

