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जंगल में बिछाया था डकैतों का जाल, लेकिन पुलिस की घेराबंदी में फंस गई पूरी गैंग 8 दिनों के पहले किया सारी वारदात का पर्दाफाश।

लटेरी संवाददाता अजय भंडारी

5 लाख रु की सनसनीखेज डकैती का खुलासा, 100 पुलिसकर्मियों ने जंगल खंगालकर दबोचे 5 आरोपी

लटेरी। लटेरी क्षेत्र में 31 मई को हुई ₹5 लाख की सनसनीखेज डकैती का पुलिस ने ऐसा खुलासा किया है जिसने अपराधियों के हौसले पस्त कर दिए हैं। घने जंगलों में फिल्मी अंदाज में अंजाम दी गई इस वारदात के बाद जहां पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल था, वहीं पुलिस के सामने भी अपराधियों तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन गया था। लेकिन पुलिस ने हार नहीं मानी। लगातार कई दिनों तक जंगलों में कॉम्बिंग, तकनीकी निगरानी, मुखबिर तंत्र की सक्रियता और 100 से अधिक पुलिसकर्मियों की संयुक्त कार्रवाई के बाद आखिरकार डकैती की पूरी गैंग कानून के शिकंजे में आ गई।
पुलिस ने न केवल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया, बल्कि लूटी गई पूरी ₹5 लाख की नकदी सहित लगभग ₹8 लाख का मशरूका भी बरामद कर लिया। जिले में हाल के वर्षों में यह सबसे बड़ी और सफल डकैती अनावरण कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।

रायपुरा गैंग ने  घेर लिया था रास्ता, जान बचाना भी हुआ था मुश्किल

पुलिश अधीक्षक रोहित कासवानी के अनुसार ग्राम नयानगर निवासी लक्ष्मण सिंह बंजारा अपने साथी मेहरवान सिंह के साथ 30 मई को मधुसूदनगढ़-लटेरी मार्ग से गुजर रहे थे। बड़ी मदागन के आगे जंगल क्षेत्र में पहले से घात लगाए बैठे बदमाशों ने उनका रास्ता रोक लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बदमाश पूरी तैयारी के साथ आए थे। उन्होंने दोनों लोगों के साथ मारपीट की, उन्हें डराया-धमकाया और फिर ₹5 लाख नगद, दो मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन, पर्स और डीजल की कैन लूटकर जंगल की ओर फरार हो गए।घटना की खबर लगते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। व्यापारियों, किसानों और आम नागरिकों के बीच भय का माहौल बन गया। लोगों में चर्चा शुरू हो गई कि आखिर इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देने वाले कौन हैं और क्या वे फिर किसी नई घटना को अंजाम देंगे।                                                  एसपी ने संभाली कमान, पुलिस महकमे में मच गई हलचल
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक विदिशा रोहित काशवानी ने तुरंत मामले को चुनौती के रूप में लिया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया।पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के जंगलों, रास्तों और गांवों में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाना शुरू किया। साइबर सेल को सक्रिय किया गया, मोबाइल लोकेशन खंगाली गई और मुखबिर तंत्र को पूरी ताकत से लगाया गया।जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस को रायपुरा क्षेत्र के कुछ संदिग्धों की जानकारी मिली। इसके बाद एसडीओपी लटेरी अमरेश बोहरे और एसडीओपी सिरोंज सोनू डाबर के नेतृत्व में एक विशाल पुलिस अभियान चलाया गया। करीब 100 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम ने रायपुरा के जंगलों, पहाड़ियों और दुर्गम इलाकों में कई दिनों तक लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया। जंगलों में चारों तरफ पुलिस की घेराबंदी की गई। रात-दिन दबिश दी गई। संभावित ठिकानों पर निगरानी रखी गई। बताया गया कि आरोपी लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे और पुलिस को चकमा देने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन तकनीकी निगरानी और मुखबिरों की सटीक सूचना ने उनके सारे रास्ते बंद कर दिए।
आखिरकार टूट गया गैंग का नेटवर्क, पांच आरोपी गिरफ्तार
लगातार दबाव के चलते पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही। एक-एक कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में रायपुरा निवासी पहलवान भील, बनवारी भील, नीलेश भील, समंदर भील और हेमराज भील शामिल हैं।पूछताछ के दौरान आरोपियों ने वारदात के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी, जिसके आधार पर पुलिस ने लूटा गया मशरूका बरामद किया।

– बरामदगी ने बढ़ाई पुलिस की प्रतिष्ठा

जिस डकैती को लेकर लोगों को आशंका थी कि रकम वापस नहीं मिलेगी, उसी मामले में पुलिस ने पूरी ₹5 लाख की नकदी बरामद कर ली।
इसके अलावा—04 मोटरसाइकिल, जला हुआ मोबाइल फोन, पर्स, खाली डीजल कैन, ट्रैक्टर की नोजल पाइप, भी जब्त की गई है। बरामद मशरूका की कुल कीमत लगभग ₹8 लाख आंकी गई है इस सफलता पर नगर लटेरी के सभी पत्रकारो ने भी पुलिस कप्तान के साथ सभी पुलिस कर्मियों का स्वागत किया

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